प्रभावितों को मुआवज़ा दिलाने की मांग तेज — विधायक ने विधानसभा में उठाई आवाज़, बेघर नागरिकों ने जारी किया खुला पत्र

भिवंडी

भिवंडी में सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा गरमाया: प्रभावितों को मुआवज़ा दिलाने की मांग तेज — विधायक रईस शेख ने विधानसभा में उठाई आवाज़, बेघर नागरिकों ने जारी किया खुला पत्र

अब्दुल गनी खान (भिवंडी)
भिवंडी शहर में सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी विधायक रईस शेख ने शीतकालीन विधानसभा सत्र में प्रभावितों के हक़ की जोरदार पैरवी की, वहीं दूसरी ओर बेघर व बेरोज़गार किए गए नागरिकों ने विधायक को संबोधित खुला पत्र जारी कर प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विधानसभा में उठी प्रभावितों की आवाज

विधायक रईस शेख ने कहा कि ठाणे-भिवंडी-कल्याण मेट्रो परियोजना के सुचारु संचालन और यातायात दबाव कम करने हेतु विकास योजना में शामिल 36 मीटर सड़क चौड़ीकरण का काम मनपा द्वारा शुरू किया गया है।
इस दौरान कई मकान व दुकानों के हिस्से तोड़े जा चुके हैं, लेकिन अब तक प्रभावितों को किसी भी रूप में मुआवज़ा नहीं मिला है, जिससे नागरिकों में गहरी नाराजगी है।
उन्होंने मांग की कि आवासीय प्रभावितों को टाटा आमंत्रा में वैकल्पिक पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए

मुआवज़ा तय करते समय भूमि मालिक और संपत्ति धारक — दोनों को समान लाभ मिले

सरकारी भूमि पर वर्षों से निवासरत/व्यवसाय करने वालों को भी संरक्षण मिले

भिवंडी के लिए MMRDA सपोर्ट पैटर्न जैसा क्षतिपूर्ति मॉडल लागू किया जाए

इसके साथ ही शेख ने एक सप्ताह के भीतर संबंधित विभागों व जनप्रतिनिधियों की बैठक आयोजित करने की मांग की है।

बेघर व बेरोजगारों का खुला पत्र — “हक़ की बात बस कागज़ पर नहीं चलेगी”

दूसरी ओर, प्रभावित नागरिकों ने अपने खुले पत्र में सवाल उठाए हैं कि:

जब BNCMC का डेवलपमेंट प्लान 2023 अभी सरकार के पास प्रस्तावित है, तो उसे ‘मंज़ूर DP’ बताकर कार्रवाई कैसे की गई?

एक ही मार्ग पर तीन अलग-अलग सड़क चौड़ाई मानक क्यों? क्या यह तकनीकी है या किसी ख़ास वर्ग को लाभ पहुंचाने का साधन?

जब मेट्रो मार्ग को भूमिगत करने का निर्णय नागरिकों को बेघर होने से बचाने के लिए लिया गया था, तो उसी क्षेत्र में तोड़-फोड़ किस तर्क पर?

बिना पंचनामा व मुआवज़ा कार्रवाई कर परिवारों को सड़क पर लाना क्या न्यायसंगत है?

           नागरिकों की प्रमुख मांगें:

1. प्रभावितों से सीधे संवाद व निष्पक्ष सत्यापन

2. अवैध/बिना-सर्वे कार्रवाई की जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन

3. सड़क चौड़ाई सहित सभी तकनीकी मानकों का सार्वजनिक खुलासा

4. भूमिगत मेट्रो के आधार पर वैकल्पिक योजना पर पुनर्विचार

नागरिकों का कहना है कि केवल बयानों से भरोसा नहीं बन पाएगा। वे चाहते हैं कि विधायक जल्द प्रभावितों से मिलकर ठोस समाधान के लिए पहल करें।

विकास बनाम विस्थापन: संतुलन की चुनौती
भिवंडी में सड़क व मेट्रो परियोजनाएँ निश्चित रूप से विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। परंतु प्रशासनिक प्रक्रिया और मुआवज़े की पारदर्शिता को लेकर बढ़ती चिंताएँ यह संकेत दे रही हैं कि विकास और जनहित— दोनों का संतुलन साधना अब सरकार के लिए अनिवार्य हो गया है।

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