भिवंडी मनपा चुनाव में भाजपा की उपेक्षा से  उत्तरभारतीय समाज में घोर नाराजगी

भिवंडी

भाजपा उत्तरभारतीय मोर्चे के पूर्व अध्यक्ष का पार्टी पर भेदभाव का लगाया आरोप

कहा,भाजपा झंडा उठाने व नारेबाजी के लिए सिर्फ कर रही यूपी वालों का इस्तेमाल

भाई,भतीजावाद चरम पर,समाज के लोगों के पास अन्य पार्टियों के अलावा नोटा खुला विकल्प

विशेष संवाददाता
भिवंडी मनपा चुनाव में भाजपा द्वारा टिकट  पाने की आस में बैठे उत्तरभारतीय समाज को मुंह की खानी पड़ी है।पार्टी ने उत्तरभारतीय समाज को टिकट देने से इनकार कर दिया है।जिसके कारण हिंदी भाषी समाज में पार्टी के प्रति घोर नाराजगी व्याप्त है।भाजपा उत्तरभारतीय मोर्चे के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा को उत्तरभारतीय समाज से एलर्जी है।पार्टी समाज के लोगों का इस्तेमाल सिर्फ नारेबाजी,भीड़ इकट्ठा करने व नारेबाजी के लिए करती है।जबकि चुनाव में यूपी वालों को टिकट देने के लिए भेदभाव कर उन्हें दरकिनार किया जाता है।उन्होंने कहा कि उत्तरभारतीय समाज इस बार भाजपा को सबक सिखाने के लिए प्रतिबद्ध है।नाराज उत्तरभारतीय समाज के पास अन्य पार्टियों के साथ “नोटा”  का विकल्प है ।
              भिवंडी मनपा चुनाव में भाजपा ने टिकट देने के बजाय उत्तरभारतीयों को ठेंगा दिखा दिया है।पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि पावरलूम नगरी भिवंडी शहर में उत्तर भारतीय समाज के एक लाख से ज्यादा मतदाता शहर में बड़ी संख्या में रहते है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रचार और समर्थन में समाज अग्रणी रहा है। इसके बावजूद मनपा चुनाव में भाजपा द्वारा उत्तर भारतीय समाज को सिर्फ एकमात्र उम्मीदवार दिए जाने से भारी असंतोष फैल गया है।जबकि समाज के दर्जनों लोगों ने भाजपा से टिकट की मांग किया था। इन क्षेत्रों से कई लोगों ने पार्टी टिकट के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उत्तर भारतीय समाज ने हमेशा निष्ठा से पार्टी का काम किया है और हिंदुत्व के हर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई है। बावजूद टिकट वितरण में उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।जबकि अन्य दलों से पार्टी में आए लोगों को टिकट दिया गया।उन्होंने बताया कि तेलंगाना और कर्नाटक से आए दक्षिण भारतीय समाज के चार लोगों को टिकट दिया गया है।जबकि उत्तरभारतीय समाज को जानबूझकर दरकिनार किया गया है।जिसके बाद हिंदीभाषी समाज के लोगो में भाजपा के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर दी दिया था।इधर भाजपा में कार्यरत तथाकथित बिना इज्जत वाले चंद छुटभैय्या नेता उत्तरभारतीयों के नाम पर धनउगाही में जुटे हुए है। नाराज उत्तरभारतीय समाज भाजपा को अपना मत देते के बजाय नोटा दबाकर अपनी नाराजगी कायम रख पार्टी को सबक सिखाने का मन बना लिया है।

भाजपा विधायक के पुत्र के साथ पूर्व नगरसेवकों के रिश्तेदारों को टिकट

भारतीय जनता पार्टी के राज्य नेतृत्व ने मनपा चुनाव में यह घोषणा की थी कि किसी भी विधायक या सांसद के परिजनों को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा। इस फैसले के बाद नासिक में एक विधायक के पुत्र ने चुनाव से नाम वापस लेकर कार्यकर्ताओं को मौका देने का उदाहरण पेश किया। लेकिन भिवंडी में इस निर्णय से अलग तस्वीर देखने को मिली।भिवंडी भाजपा विधायक महेश चौघुले के पुत्र मित चौघुले को पार्टी ने  उम्मीदवार बनाया है। इसे लेकर आम नागरिकों और पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि राज्य नेतृत्व के फैसले को भिवंडी में नजरअंदाज किया गया है।इसके अलावा कई पूर्व नगरसेवकों के पत्नी,पुत्र व भाई ,भतीजे व रिश्तेदारों को टिकट दिया गया है।हालांकि चुनाव समिति के प्रमुख प्रेषित जयवंत ने कहा कि चुनाव में जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है।

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