अब्दुल गनी खान
भिवंडी – भूमि अभिलेख विभाग की लंबित मांगों पर सरकार द्वारा कोई संतोषजनक निर्णय न लिए जाने के कारण, कर्मचारियों द्वारा शुरू किए गए ‘काम बंद’ आंदोलन से आम जनता के कई काम ठप हो गए हैं।
उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भूमि अभिलेख कर्मचारियों को अभी तक तकनीकी वेतनमान लागू नहीं किया गया है। साथ ही, 150 दिनों के कार्ययोजना कार्यक्रम में राजस्व मंत्री द्वारा मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिए जाने के बाद भी उस पर अमल नहीं किया जा रहा है। इसी के विरोध में शुक्रवार को राज्य भर के भूमि अभिलेख कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

भूमि अभिलेखा कर्मचारियों ने मांग कि है कि तकनीकी वेतनमान लागू किया जाए। संशोधित संरचना के अनुसार भूकरमापक और रखरखाव भूकरमापक के बढ़े हुए पदों को मंजूरी दी जाए। सर्वेक्षण कर्मचारियों के लिए एक निश्चित यात्रा भत्ता तय कर उसे वेतन में शामिल किया जाए। अन्य विभागों के अधिकारियों को पर्याप्त तकनीकी ज्ञान न होने के कारण, उन्हें इस विभाग में स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति पर न भेजा जाए। विभाग का निजीकरण न किया जाए।
महाराष्ट्र राज्य भूमि अभिलेख कर्मचारी कार्य समिति के नेतृत्व में 18 फरवरी से विभिन्न चरणों में आंदोलन किया जा रहा है। इसमें सर्वेक्षण उपकरण कार्यालय में जमा करना, असहयोग आंदोलन, काली पट्टी बांधकर विरोध जताना, सामूहिक अवकाश और ‘आक्रोश आंदोलन’ के बाद अब अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन शुरू किया गया है। इस आंदोलन के कारण तहसील स्तर पर नागरिकों की जमीन नापने के काम रुक गए हैं, जिससे लोगों को काफी असुविधा हो रही है।
इस बीच, भिवंडी भूमि अभिलेख विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सांसद सुरेश म्हात्रे और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कपिल पाटिल को सौंपा है और उनसे सरकार के पास इन मांगों का समाधान करवाने का अनुरोध किया है।

