भिवंडी में जहरीली हवा का कहर, काले धुएं में घुट रही शहर की सांसें

ठाणे

डाइंग-साइजिंग इकाइयों पर महापौर का सीधा हमला।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर मिलीभगत के गंभीर आरोप।

विशेष संवाददाता
ठाणे: भिवंडी पावरलूम नगरी के रूप में देशभर में पहचान रखने वाला भिवंडी एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में आ गया है। शहर के डाइंग और साइजिंग उद्योगों से निकल रहा काला धुआं आसमान पर धुंध की मोटी परत बनाकर छा गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है और स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई फैक्ट्रियों में सस्ते ईंधन के लालच में प्लास्टिक कचरा, पुराने जूते-चप्पल और अन्य जहरीले पदार्थ खुलेआम जलाए जा रहे हैं। इनसे निकलने वाला धुआं वातावरण में खतरनाक रसायन घोल रहा है, जिससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़कर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। रात के समय इन गतिविधियों में और तेजी आ जाती है, जब निगरानी लगभग न के बराबर रहती है।
इस गंभीर मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भिवंडी महानगरपालिका के महापौर नारायण चौधरी ने कल्याण स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर खुलेआम प्रदूषण संभव नहीं है। लगातार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। महापौर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो महानगरपालिका सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर की हवा दिन-ब-दिन जहरीली होती जा रही है और इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। श्वसन संबंधी बीमारियों और फेफड़ों के रोगों में तेजी से बढ़ोतरी इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। वहीं, स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि निरीक्षण के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती है, जबकि हकीकत में फैक्ट्रियों में रात के अंधेरे में खुलेआम कचरा जलाया जाता है। लोगों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं।
    गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब भिवंडी में प्रदूषण का मुद्दा उठा हो। इससे पहले स्थानीय विधायक महेश चौगुले भी कचरा माफियाओं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं, लेकिन हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भिवंडी के नागरिकों को इस जहरीली हवा से आखिर कब राहत मिलेगी। क्या प्रशासन इस बार सख्त कार्रवाई कर प्रदूषण पर लगाम लगाएगा या फिर यह गंभीर संकट भी फाइलों में दबकर रह जाएगा—इस पर पूरे शहर की नजर टिकी हुई है।

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