शिवसेना नगरसेवकों ने जताया विरोध, बजट बैठक में मानधन और अवैध निर्माण के मुद्दे भी गरमाए
अब्दुल गनी खान
भिवंडी महानगरपालिका की पहली विशेष महासभा सोमवार को हंगामे के बीच शुरू हुई। मेयर नारायण चौधरी के तय समय से करीब एक घंटे देरी से पहुंचने पर सभागृह में नगरसेवकों ने जोरदार विरोध किया। खासतौर पर शिवसेना के नगरसेवकों ने मेयर की लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए बैठक समय पर शुरू करने की मांग की। यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दरअसल, मनपा प्रशासन ने 1179 करोड़ 10 लाख 97 हजार रुपये के बजट पर चर्चा के लिए सोमवार सुबह 11 बजे पहली विशेष महासभा बुलाई थी। सभी नवनियुक्त नगरसेवक समय पर सभागृह में पहुंच गए थे, लेकिन मेयर के देर से आने के कारण बैठक की कार्यवाही भी देर से शुरू हो सकी।
बैठक शुरू होने से पहले ही शिवसेना के नगरसेवक कमलाकर पाटिल ने मेयर की गैरमौजूदगी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सभागृह में हंगामा करते हुए मांग की कि मेयर की अनुपस्थिति में भी महासभा की कार्यवाही शुरू की जाए।
इस दौरान एक नवनियुक्त नगरसेवक ने नगरसेवकों के मानधन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें मात्र 10 हजार रुपये मानधन मिलता है, जो एक मजदूर की तनख्वाह से भी कम है। उन्होंने प्रशासन से मानधन बढ़ाने की मांग की। इस पर आयुक्त ने कहा कि मानधन बढ़ाना या घटाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मानधन में वृद्धि का प्रस्ताव स्वीकृत होकर आता है तो उसका भुगतान मनपा प्रशासन करेगा।
महासभा में रोमा निलेश आलसी ने शिवाजी चौक क्षेत्र में निर्माणाधीन 17 मंजिला कथित अवैध इमारत का मुद्दा उठाया और कार्रवाई की मांग की।
वहीं वरिष्ठ नगरसेवक संतोष एम. शेट्टी ने पोगांव में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण कार्य का मामला उठाते हुए कहा कि इससे मनपा को लगभग 25 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह काम वैध रूप से होता तो कम से कम 15 हजार मजदूरों को रोजगार मिल सकता था।
इस पर मनपा प्रशासन ने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बजट को लेकर नगरसेवकों के बीच जमकर बहस हुई और समाचार लिखे जाने तक महासभा की कार्यवाही जारी थी।

