अब्दुल गनी खान भिवंडी:
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब देश के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित एशिया की सबसे बड़ी पावरलूम नगरी इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। युद्ध के चलते कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में उछाल आया है, जिससे यार्न (धागे) के दाम में 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर तैयार कपड़े की मांग घटने से लूम मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भिवंडी के पावरलूम कारोबारियों का कहना है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार में कपड़े के दाम नहीं बढ़ पा रहे हैं। ऐसे में कपड़ा लागत से कम कीमत पर बेचना मजबूरी बन गया है। कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई लूम इकाइयों में तालाबंदी की नौबत आ सकती है।
7 लाख पावरलूम और हजारों उद्योग प्रभावित
शांतिनगर पावरलूम वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मन्नान सिद्दीकी ने बताया कि भिवंडी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 7 लाख पावरलूम संचालित होते हैं, जो देश के कुल पावरलूम उद्योग का लगभग 33 फीसदी हिस्सा हैं। यहां कपड़ा उद्योग का वार्षिक कारोबार करीब 10 हजार करोड़ रुपये का है।
उन्होंने बताया कि यह उद्योग लगभग 700 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और लाखों मजदूरों को रोजगार देता है। यहां काम करने वाले अधिकांश श्रमिक दूसरे राज्यों से आकर 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में काम करते हैं। भिवंडी में रोजाना करीब 420 लाख मीटर ग्रे कपड़े का उत्पादन होता है, जिसे डाइंग और प्रिंटिंग के लिए देशभर में भेजा जाता है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से धागा महंगा
पावरलूम मालिक श्रीनिवास बल्लाल ने बताया कि सिंथेटिक, पॉलिस्टर और नायलॉन धागा मुख्य रूप से पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल से तैयार होता है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसका सीधा असर धागे की कीमतों पर पड़ा है।
उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में यार्न के दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इसका सीधा नुकसान कपड़ा उत्पादकों को झेलना पड़ रहा है।”
मांग घटी, पुराने रेट पर माल बेचने की मजबूरी
लूम मालिक शीतला प्रसाद मिश्रा ने बताया कि देश के जिन हिस्सों में सिंथेटिक और पॉलिस्टर धागा तैयार होता है, वहां महंगा कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है। साथ ही मालभाड़े में अचानक वृद्धि और ढुलाई में देरी से लागत और बढ़ गई है।

वहीं, भाड़े पर लूम चलाने वाले शिव प्रसाद मिश्र ने कहा कि भिवंडी में बड़े पैमाने पर ‘जॉब वर्क’ के आधार पर कपड़ा उत्पादन होता है। व्यापारी पहले से ऑर्डर बुक करते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में पुराने रेट पर माल बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि धागे की कीमतों में लगातार अस्थिरता के कारण व्यापारी स्टॉक जमा नहीं कर पा रहे हैं और नए ऑर्डर भी कम दे रहे हैं। इसका असर भिवंडी के साथ-साथ मालेगांव और इचलकरंजी जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों पर भी पड़ रहा है।
छोटे उद्योगों पर भी मंदी की मार
व्यवसायी राकेश केसरवानी ने कहा कि कीमतों में अस्थिरता और कपड़े की बिक्री में गिरावट ने भिवंडी के पावरलूम कारोबार को एक बार फिर संकट में डाल दिया है। इसका असर केवल लूम मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े छोटे-बड़े लघु उद्योग भी भीषण मंदी की चपेट में आ गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में रोजगार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।

