मिल्लत नगर ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित, अब सख्ती की मांग तेज

भिवंडी

नाइट विजिलेंस, अवैध गतिविधियों और ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई की उठी आवाज

अब्दुल गनी खान
भिवंडी, लंबे समय से चल रहे स्थानीय प्रयासों के बाद मिल्लत नगर क्षेत्र को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित किए जाने के बावजूद यहां ध्वनि प्रदूषण और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। ऐसे में अब नागरिकों ने सख्त कार्रवाई और नियमित पुलिस गश्त की मांग तेज कर दी है।

इसी मुद्दे को लेकर “नेबर्स ऑफ मिल्लत नगर फाउंडेशन” की एक अहम बैठक और प्रेस वार्ता फ़ैज़ान आज़मी के निवास पर आयोजित की गई। बैठक में बदीउज्जमान खान, इंजीनियर जावेद आज़मी, सलीम रहमतुल्लाह अंसारी, सैय्यद नूरअली, वसीम शेख, नावेद शेख सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

       रात में गश्त और सख्ती की मांग

फाउंडेशन ने पुलिस प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से मिल्लत नगर ब्लॉक 2 और 4 में तत्काल रात्रि गश्त शुरू करने की मांग रखी। इसके अलावा बदले हुए साइलेंसर वाली तेज आवाज़ करने वाली बाइकों पर कार्रवाई, शादी समारोहों में पटाखों के इस्तेमाल पर रोक और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

   नशाखोरी और असामाजिक तत्वों पर चिंता

नागरिकों ने आर.एन. नब्बू मैदान में नशाखोरी और आरिफ गार्डन में रात के समय होने वाली तोड़फोड़ की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई। इन स्थानों पर नियमित छापेमारी और निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई गई।

स्कूलों के पास तंबाकू बिक्री पर रोक की मांग

बैठक में स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठी। फाउंडेशन का कहना है कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।

       शादी हॉल में पार्किंग का दुरुपयोग

फाउंडेशन ने यह भी मांग की कि फरहान खान शादी हॉल में कार्यक्रम केवल हॉल के अंदर आयोजित किए जाएं, पार्किंग क्षेत्र का उपयोग कार्यक्रमों के लिए न हो, जिससे आसपास के निवासियों को परेशानी होती है।

           पुलिस से सख्ती की अपील

फाउंडेशन ने निजामपुरा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक से अपील की है कि साइलेंस ज़ोन के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और क्षेत्र में बढ़ रही अव्यवस्थाओं पर तुरंत अंकुश लगाया जाए।

           ‘घोषणा नहीं, अमल चाहिए’

स्थानीय निवासियों का कहना है कि साइलेंस ज़ोन घोषित होना राहत भरा कदम है, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर सख्ती नहीं होगी, तब तक इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। फाउंडेशन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।

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