ड्रग्स माफियाओं का हब बना भिवंडी,आए दिन हो रहे खुलासों से पुलिस की सक्रियता पर सवाल
विशेष संवाददाता भिवंडी
भिवंडी के वेयरहाउस से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने जिस कोकीन सप्लाई के अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश किया है,उसका संचालन मार्बल कारोबार की आड़ में चल रहा था।जो गोदाम बाहुल्य रहनाल इलाके के लक्ष्मण कंपाउंड में स्थित था।इस कार्रवाई में वेयरहाउस से 213 किलो कोकीन बरामद होने के बाद पूरे गोदाम क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।लेकिन कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि भिवंडी ड्रग्स माफियाओं का हब बन गया है।जिसका लगातार बढ़ रहे कारोबार ने पुलिस की सक्रियता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

NCB की टीम ने रहनाल गांव के लक्ष्मण कंपाउंड में रोड किनारे बने वेयरहाउस नंबर 602/2 पर छापा मारा। जांच में सामने आया कि इस गोदाम का इस्तेमाल ड्रग्स के भंडारण और सप्लाई के लिए किया जा रहा था। छापेमारी के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों और आसपास के वेयरहाउस कर्मचारियों ने कई चौंकाने वाली जानकारियां दीं।स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 10 दिन पहले एक भारी-भरकम मशीन इस गोदाम में लाई गई थी। मशीन इतनी बड़ी थी कि उसे अंदर ले जाने के लिए मुख्य गेट पर लगा लोहे का एंगल काटना पड़ा था। लोगों ने बताया कि मशीन के साथ कुछ बाहरी लोग भी आए थे। इलाके में रोजाना ट्रकों की आवाजाही और लोडिंग-अनलोडिंग होती रहती है, इसलिए किसी को कोई शक नहीं हुआ।लोगों का कहना है कि गोदाम के बाहर किसी कंपनी या कारोबार का कोई बोर्ड भी नहीं लगा था, जिससे यह पता चल सके कि अंदर किस प्रकार का व्यवसाय चल रहा है। NCB की कार्रवाई के बाद ही आसपास के लोगों को पता चला कि वहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का ड्रग्स नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस गोदाम के मालिक ओमप्रकाश गुप्ता हैं, जो पास में ही “मनीषा क्लियरिंग एजेंसी” नाम से कारोबार चलाते हैं। जब उनसे फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में उन्होंने यह गोदाम नितिन नामक व्यक्ति को एग्रीमेंट के जरिए किराए पर दिया था। गुप्ता के अनुसार किराएदारों ने खुद को मार्बल कारोबारी बताया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ दिन पहले एक बड़ी मशीन गोदाम में लाई गई थी, लेकिन वह मशीन कहां से आई और उसका क्या इस्तेमाल था, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।जांच अधिकारियों के अनुसार कोकीन को विशेष रूप से तैयार की गई मशीनों के अंदर बनी गुप्त जगहों में छिपाकर भारत लाया गया था। प्रत्येक पैकेट को अलग-अलग प्रकार की पॉलीथिन की नौ परतों में पैक किया गया था, जिनमें एक परत काले चिकने पदार्थ की भी थी, ताकि जांच एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके।अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह वेयरहाउस, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से ड्रग्स की तस्करी और सप्लाई कर रहा था। फिलहाल NCB इस नेटवर्क के सरगनाओं, फाइनेंसरों, सप्लायरों और संभावित खरीदारों की तलाश में जुटी है।
इससे पहले नदीनाका इलाके के फरीदबाग इलाके में स्थित इस्माइल मेंसन के तीसरे महले पर स्थित फ्लैड नंबर 308 में गुजरात एटीएस ने 8 अगस्त 2024 को छापामार कर 800 करोड़ रुपए कीमत का 792 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बरामद किया था।

