करोड़ों के ठेके, लेकिन मजदूरों के लिए नहीं थे सुरक्षा इंतजाम; ठेकेदार और प्रशासन पर उठे सवाल
भिवंडी : भिवंडी निजामपूर शहर महानगरपालिका द्वारा बारिश पूर्व नाला सफाई अभियान को युद्धस्तर पर चलाने के दावों के बीच गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। प्रभाग समिति क्रमांक-2 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 14 के पिरानी पाड़ा इलाके में नाला सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने पर एक दिहाड़ी मजदूर की मौत हो गई। घटना के बाद मनपा प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है।
जानकारी के मुताबिक, पिरानी पाड़ा स्थित सत्तार मेडिकल के पास नाला सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान सफाई कार्य में लगे मजदूर सुभाष नवसा दिघे (45) बंद नाले में उतरे, जहां जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया। साथी मजदूरों ने उन्हें बाहर निकालकर इंदिरा गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाले से तेज दुर्गंध और जहरीली गैस निकल रही थी, इसके बावजूद मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम पर उतार दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मजदूरों को न ऑक्सीजन मास्क दिए गए थे, न सुरक्षा बेल्ट और न ही गैस जांचने की कोई व्यवस्था की गई थी।
गौरतलब है कि प्रभाग समिति क्रमांक-2 में नाला सफाई का ठेका चंद्रिका कंस्ट्रक्शन को 39 लाख 99 हजार 958 रुपये में दिया गया है। वहीं प्रभाग समिति क्रमांक-5 का ठेका भी इसी कंपनी को 39 लाख 78 हजार 733 रुपये में मिला है। करोड़ों रुपये के ठेकों के बावजूद मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही सामने आने से लोगों में आक्रोश है।
विडंबना यह है कि नारायण चौधरी लगातार नाला सफाई कार्यों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन गुरुवार की घटना ने उन दावों की सच्चाई उजागर कर दी। हादसे के कई घंटे बाद तक मनपा प्रशासन और संबंधित ठेकेदार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मृतक मजदूर के परिवार को आर्थिक सहायता देने, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इलाके में मनपा प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी का माहौल है।

