गरीब मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग मौन!
अब्दुल गनी खान
भिवंडी शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में बिना लाइसेंस के अवैध क्लीनिक और अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इन तथाकथित डॉक्टरों और अस्पतालों में गरीब और सीधे-साधे मरीजों को फंसाकर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की कूपा दृष्टि और मिलीभगत के कारण ये अवैध अस्पताल और क्लीनिक कुकुरमुत्ते की तरह फैल चुके हैं। दलालों के जरिए मरीजों को अच्छे इलाज का झांसा देकर इन जगहों पर ले जाया जाता है, जहां उनका आर्थिक शोषण तो किया ही जाता है, साथ ही कई बार इलाज के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
दवा और जांच में धंधा
सूत्रों के अनुसार, छोला छाप डॉक्टरों से लेकर बड़े अस्पतालों तक मरीजों का अनावश्यक चेकअप कराया जाता है। इसमें दलालों को 40 प्रतिशत तक का “कट” दिया जाता है। इतना ही नहीं, मेडिकल स्टोर पर दवाइयाँ लिखने के नाम पर भी कमीशन लिया जाता है। कई बार दवा कंपनियों से महंगे गिफ्ट और कमीशन भी वसूला जाता है।
प्रशासन पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार स्वास्थ्य विभाग इन पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं करता? क्या विभाग के कुछ अधिकारी भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं?
लोगों में गहरी नाराजगी है कि आम नागरिकों के जीवन से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग कब इन अवैध क्लीनिक व अस्पतालों पर जांच अभियान चलाकर कार्रवाई करता है, या फिर हमेशा की तरह “लीपा-पोती” कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा।

