अदानी सीमेंट प्रोजेक्ट पर विरोध की बौछार; सुनवाई के शाही मंडप का खर्च किसने किया? नागरिकों का सवाल

ठाणे



अब्दुल गनी खान(कल्याण)

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका क्षेत्र के मोहने स्थित एनआरसी कंपनी की खाली पड़ी जमीन पर अदानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ग्राइंडिंग फैक्ट्री का प्रस्ताव जोरदार विरोध में फंस गया है। हजारों नागरिकों, किसानों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) कल्याण कार्यालय में इस प्रोजेक्ट के खिलाफ लिखित आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।

आज इन आपत्तियों की सुनवाई एनआरसी कंपनी परिसर में हुई। इसके लिए शाही मंडप लगाया गया था और भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ सैकड़ों निजी सुरक्षा गार्ड (बाउंसर) तैनात किए गए थे। सुनवाई के दौरान अदानी प्रोजेक्ट को लेकर नागरिकों ने जमकर विरोध जताया और नारेबाजी की।

लाखों का खर्च, सवालों के घेरे में अधिकारी

कामगार नेता श्यामदादा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि अदानी ग्रुप के लिए सरकारी अधिकारी “पायघड़ी” घालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शाही मंडप, बाउंसर और पुलिस अधिकारियों के लिए की गई शाही व्यवस्था का खर्च आखिर किसने किया? गायकवाड़ का कहना था कि हजारों आपत्तियों की सुनवाई महज दिखावा है, जबकि जनता के गले यह प्रोजेक्ट नहीं उतर रहा।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य अधिकारी जे.एस. हजारे ने बताया कि सुनवाई में लगभग 2,800 आपत्तियों पर चर्चा हुई और इन्हें आगे जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार के प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भेजा जाएगा। लेकिन शाही मंडप और व्यवस्था अदानी ग्रुप की ओर से कराई गई थी, हमारे कार्यालय से कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया गया—ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे का दावा

नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सुनवाई में कहा कि सीमेंट ग्राइंडिंग प्लांट से भारी प्रदूषण होगा। सीमेंट की धूल, जहरीली गैसें और हैवी मेटल्स (क्रोमियम, निकेल, लेड आदि) जमीन और पानी को दूषित करेंगे। इससे खेती की जमीन बंजर होगी, जलस्रोत प्रदूषित होंगे और नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा।

पर्यावरणप्रेमी श्रीनिवास घाणेकर ने बताया कि प्लांट से निकलने वाला प्रदूषण कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र की नदियों और पंपिंग स्टेशनों तक पहुंचेगा, जिससे लाखों लोगों की पेयजल व्यवस्था प्रभावित होगी। वहीं, 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग 14.82 लाख लोग, 38 गांव (कल्याण), 29 गांव (भिवंडी) और 3 गांव (अंबरनाथ) प्रभावित होंगे। नागरिकों को सांस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी रहेगा।

नागरिकों का आंदोलन का इशारा

कामगार नेता गायकवाड़ ने कहा कि यह जमीन मूलतः स्थानीय किसानों की थी, जो एनआरसी कंपनी को दी गई थी। अब कंपनी बंद हो चुकी है, इसलिए यह जमीन किसानों को वापस दी जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

एक तरफ अदानी ग्रुप और सरकारी अधिकारी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ नागरिक, सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमी इसे जनता और पर्यावरण के लिए “विनाशकारी” बताते हुए सख्त विरोध जता रहे हैं।

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