किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और मुआवजे की मांग को लेकर तहसील कार्यालय पर मोर्चा
भिवंडी। संवाददाता – अब्दुल गनी खान
किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट) ने भिवंडी तहसील कार्यालय पर जोरदार आंदोलन किया।
यह मोर्चा भिवंडी प्रांत कार्यालय से भव्य रैली के रूप में निकला और “शेतकऱ्यांना न्याय द्या” तथा “कर्जमाफी लागू करा” जैसे नारों से शहर गुंजायमान हो उठा। रैली तहसीलदार कार्यालय पहुंचने पर शिवसैनिकों ने सरकार के खिलाफ तीव्र रोष व्यक्त किया।
शिवसेना भिवंडी शहर जिला प्रमुख मनोज गगे ने बताया कि यह आंदोलन शिवसेना पक्षप्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आदेशानुसार तथा विरोधी पक्षनेता अंबादास दानवे और सचिव विनायक राऊत की संकल्पना के तहत आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की दुर्दशा को अनदेखा कर रही है। लगातार बारिश और बाढ़ के कारण हजारों किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, मगर सरकार केवल आश्वासन दे रही है, ठोस मदद नहीं।

आंदोलन के दौरान शिवसैनिकों ने प्रांत अधिकारी और तहसीलदार को एक विस्तृत निवेदन सौंपा, जिसमें प्रमुख मांगें रखी गईं —
किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी
प्रति हेक्टेयर ₹50,000 की नुकसान भरपाई
बाढ़ में बह गए घरों के पुनर्निर्माण और समग्र सहायता की मांग
शिवसेना नेताओं ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने किसानों की तत्काल मदद नहीं की, तो शिवसेना सड़कों पर उतरेगी — और आज का यह आंदोलन उसी संकल्प का परिणाम है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा घोषित राहत केवल “कागजी दिखावा” है, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों तक कोई वास्तविक सहायता नहीं पहुंच रही।
इस आंदोलन में जिला संपर्क प्रमुख मनोज गगे, उपनेते विश्वास थले, जिला प्रमुख कुंदन पाटिल, महिला लोकसभा संपर्क प्रमुख आशा रसाल, तालुका प्रमुख करसन ठाकरे, शहर प्रमुख प्रसाद पाटील, महानगर प्रमुख अरुण पाटील, जिला सचिव राजाभाऊ पुण्यार्थी, वैशालीताई मेस्त्री, नाना झलके, जय भगत, नितेश दांडेकर और प्रकाश भोईर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पूरे आंदोलन के दौरान शिवसैनिकों ने अनुशासन और शांति बनाए रखी, लेकिन अपनी मांगों को लेकर वे पूरी दृढ़ता से डटे रहे।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और वास्तविक मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

