प्रभाग समिति तीन में 40 साल पुरानी शाला का मलबा और कीमती सामग्री रहस्यमय तरीके से गायब!
नगरपालिका प्रशासन की चुप्पी से उठे सवाल
अब्दुल गनी खान
भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र में पुरानी इमारतों को तोड़ने के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप एक बार फिर सामने आया है। पद्ममा नगर स्थित मनपा शाला क्रमांक 23, 59, 61, 75 और 55 की लगभग 40 साल पुरानी इमारत को हाल ही में ढहा दिया गया। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि इमारत के मलबे में मौजूद सागवान की लकड़ी, लोहे के गाटर और अन्य कीमती सामग्री आखिर कहां गई?

जानकारी के अनुसार, मनपा बांधकाम विभाग के अभियंता हरीश म्हात्रे ने उक्त शैक्षणिक इमारत को जर्जर घोषित कर उसे तोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके बाद प्रभाग समिति क्रमांक 3 के सहायक आयुक्त सुरेंद्र भोईर को तोड़क कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
जब सहायक आयुक्त भोईर से इस संबंध में संपर्क किया गया, तो उन्होंने यह स्वीकार किया कि इमारत मनपा कर्मियों द्वारा तोड़ी गई थी। लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि मलबा कहां जमा किया गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और बाद में कॉल भी डिस्कनेक्ट कर दिया।
वहीं, अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त विक्रम दराडे ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी ही नहीं है और न ही यह पता है कि तोड़क आदेश किसने जारी किया।

इस पूरे प्रकरण ने नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता परमेश्वर अंभोरे ने आरोप लगाया है कि नियमों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक इमारत के मलबे को कोनवाडा स्थित मनपा यार्ड में जमा कर लिलाव प्रक्रिया के माध्यम से बेचा जाना चाहिए था, जिससे राजस्व प्राप्त होता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, बल्कि स्थानीय स्तर पर कीमती सामग्री बेचकर लाखों रुपये का नुकसान मनपा को पहुंचाया गया है।
अंभोरे ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि 40 साल पुरानी शैक्षणिक संस्था की इमारत ढहाने से पहले पारदर्शिता और नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।
फिलहाल, मनपा प्रशासन की चुप्पी इस पूरे प्रकरण को और अधिक संदिग्ध बना रही है और नागरिक अब प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर शाला का मलबा और कीमती सामग्री कहां गई?

