जिला परिषद निर्माण विभाग की जांच में बोगस काम का खुलासा ,ठेकेदार पर कार्रवाई के आदेश
अब्दुल गनी खान भिवंडी।
भिवंडी तालुका के पडघा बालाजी नगर क्षेत्र में किए गए भूमिगत गटर निर्माण कार्य में भारी धांधली का पर्दाफाश हुआ है। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद आखिरकार जिला परिषद के बांधकाम (निर्माण) विभाग ने मौके पर जांच कर यह स्पष्ट किया कि कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ और निकृष्ट गुणवत्ता का इस्तेमाल किया गया है। विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जिससे ग्राम पंचायत प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, बालाजी नगर में भूमिगत गटर योजना के लिए लगभग 26 लाख रुपये का खर्च किया गया था। लेकिन जांच के दौरान पाया गया कि गटर पाइप का ढलान गलत है, सीमेंट की गुणवत्ता अत्यंत खराब है और कई स्थानों पर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। परिणामस्वरूप गटर का पानी बहने के बजाय सड़कों पर फैल गया, जिससे बदबू, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा
“ग्राम पंचायत ने हमें स्वच्छता का सपना दिखाया, लेकिन बदले में मिली दुर्गंध और बोगस काम की सजा!”
जिला परिषद की जांच में खुलासा
नागरिकों की शिकायत के बाद ठाणे जिला परिषद के बांधकाम विभाग ने एक विशेष जांच समिति गठित की। समिति ने हाल ही में स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि “गटर योजना का कार्य अत्यंत निकृष्ट स्तर का है और ठेकेदार ने तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया है।”
उपविभागीय अभियंता ने ठेकेदार पर तुरंत कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं और ग्राम पंचायत को चेतावनी दी है कि “भविष्य में ऐसे काम किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।”
ठेकेदार का बचाव
दूसरी ओर, संबंधित ठेकेदार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “कार्य नियमानुसार किया गया है, कुछ स्थानों पर स्थानीय कारणों से पानी रुक सकता है।”
हालांकि अभियंताओं की रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि कम से कम 7 स्थानों पर गटर लाइन टूटी, झुकी या गाद से भरी हुई मिली है।
ग्राम पंचायत पर भी सवाल
गांव में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कुछ ग्राम पंचायत सदस्य और पूर्व पदाधिकारी ठेकेदार से जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहे हैं —
“कंट्रैक्ट देते समय गुणवत्ता पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?”
“26 लाख के इस काम में किसे कितना फायदा हुआ?”
कुछ नागरिक अब इस मामले की शिकायत लोकायुक्त और ग्रामीण विकास विभाग में करने की तैयारी कर रहे हैं।
कड़ी कार्रवाई के निर्देश
उपविभागीय अभियंता ने ग्राम पंचायत को आदेश दिया है कि संबंधित ठेकेदार को तुरंत मरम्मत कार्य का आदेश दिया जाए। यदि दुरुस्ती कार्य संतोषजनक नहीं हुआ तो उसका भुगतान रोका जाए और भविष्य की निविदाओं से ब्लैकलिस्ट किया जाए।
साथ ही ग्राम पंचायत को निर्देश दिया गया है कि सभी भूमिगत गटर योजनाओं की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करें।
पडघा बालाजी नगर का यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की एक सजीव मिसाल बन गया है। जिला परिषद द्वारा उठाया गया यह कदम तो शुरुआत भर है — आने वाले कदम निर्णायक साबित हो सकते हैं।

