कांग्रेस या भाजपा, जिसे मिलेगा समर्थन वही बनेगा महापौर; कोणार्क विकास आघाड़ी भी मजबूत दावेदार
विशेष संवाददाता
भिवंडी महानगरपालिका में इस बार महापौर की कुर्सी की चाभी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के हाथ आ गई है। पहली बार 12 सीटों पर जीत दर्ज कर राकांपा (शरद) किंगमेकर की भूमिका में उभरकर सामने आई है। ऐसे में वह कांग्रेस या भाजपा में से जिसे भी समर्थन देगी, उसी का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है और सस्पेंस बरकरार है।
मनपा चुनाव परिणामों के अनुसार कांग्रेस ने अकेले 30 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है, जबकि भाजपा-शिवसेना (शिंदे) की महायुति को कुल 34 सीटें मिली हैं। वहीं राकांपा (शरद) को 12 और कोणार्क विकास आघाड़ी को 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक यदि कांग्रेस अपने 30 नगरसेवकों के साथ राकांपा (शरद) के 12 नगरसेवकों का समर्थन जुटा लेती है तो कुल संख्या 42 तक पहुंच जाती है। ऐसे में यदि कोणार्क विकास आघाड़ी के 4 नगरसेवक भी कांग्रेस के पाले में आते हैं तो 46 के जादुई आंकड़े को छूते हुए कांग्रेस अपना महापौर बना सकती है।
दूसरी ओर भाजपा-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन के पास 34 नगरसेवक हैं और महापौर पद के लिए उसे 12 और नगरसेवकों की जरूरत होगी। भाजपा की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल के भतीजे सुमित पाटिल और साफ-सुथरी छवि वाले नारायण चौधरी को महापौर पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। बताया जाता है कि नारायण चौधरी के न सिर्फ पार्टी के भीतर बल्कि अन्य दलों के कई नगरसेवकों से भी अच्छे संबंध हैं। उनके सपा विधायक रईस शेख और सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा से भी बेहतर ताल्लुकात बताए जाते हैं। यदि भाजपा राकांपा (शरद) के 12 नगरसेवकों का समर्थन हासिल करने में सफल रहती है तो उसका भी महापौर बनना संभव है।
इधर, महज 4 नगरसेवकों वाली कोणार्क विकास आघाड़ी को हल्के में लेना भी राजनीतिक गलती मानी जा रही है। इससे पहले वह सिर्फ 6 नगरसेवकों के सहारे भी महापौर बना चुकी है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास 47 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत होने के बावजूद पार्टी के 18 नगरसेवकों ने बगावत कर कोणार्क विकास आघाड़ी का समर्थन किया था और उसी के दम पर कोणार्क ने महापौर की कुर्सी हासिल की थी। इस बार भी कोणार्क, सपा के नगरसेवकों के साथ राकांपा और कांग्रेस को साधकर बड़ा उलटफेर कर सकती है।
अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठता है और आखिरकार भिवंडी मनपा का महापौर कौन बनता है।

