आरक्षण की घोषणा होते ही भिवंडी मनपा मेयर पद को लेकर रस्साकसी शुरू

भिवंडी

मनपा में किसी पार्टी को बहुमत न होने से हॉर्स ट्रेडिंग होने की चर्चा जोरों पर

विशेष संवाददाता

भिवंडी मनपा में महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद यहां राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।सभी राजनीतिक दल अपने नगरसेवक की संख्या बल के हिसाब से सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।मनपा में किसी पार्टी का बहुमत न होने से हॉर्स ट्रेडिंग होने की चर्चा जोरों पर शुरू है।ऐसे में कांग्रेस,राकांपा(शरद) व सपा का महापौर होना यहां लगभग तय माना जा रहा है।दूसरी तरफ भाजपा और शिवसेना (शिंदे) द्वारा भी मेयर बनने के लिए गुणा गणित शुरू कर दिया गया है।
                   90 नगरसेवकों वाली भिवंडी मनपा में कांग्रेस के सबसे अधिक 30 नगरसेवक चुनकर आए हैं।जिसे राष्ट्रवादी कांग्रेस( शरद ) के 12 नगरसेवक मिला कर कुल 42 नगरसेवक होते हैं जो बहुमत के 46 के आंकड़े से 4 नगरसेवक कम हैं।जिसमें कोणार्क आघाड़ी के प्रमुख पूर्व महापौर विलास पाटिल के पास 4 नगरसेवक हैं इससे भी महापौर बनाने के लिए बहुमत जुटाने का आंकड़ा बैठ सकता है। लेकिन पिछले रिकार्ड खंगाले जाएं तो विलास पाटिल खुद महापौर बनने का आंकड़ा जुटाने में माहिर है और ऐसा वह कई बार कर चुके हैं। वह 6 नगरसेवक लेकर 56 का समर्थन जुटाने का करिश्माई कारनामा कर चुके है।कांग्रेस के पास तारिक अंसारी,प्रशांत लाड और विलास पाटिल व प्रतिभा पाटिल के रूप में विकल्प है।वहीं भाजपा शिवसेना की महायुति के पास भी कुल मिला कर 32 नगरसेवक हैं जो बहुमत से काफी दूर है।उन्हें मेयर बनाने के लिए 14 नगरसेवक की जरूरत पड़ेगी।ऐसे में यदि राकांपा (शरद) के 12 और पूर्व महापौर जावेद दलवी के तीन नगरसेवकों का समर्थन मिलता है तो भाजपा अपना महापौर बना सकती है।भाजपा की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल के भतीजे सुमित पाटिल व साफ सुथरा छवि वाले नारायण चौधरी के अलावा संतोष शेट्टी के रूप में बेहतर विकल्प है जो महापौर पद के प्रबल दावेदार है। साथ ही भाजपा  नगरसेवकों नारायण चौधरी का सपा विधायक रईस शेख और सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा से भी बेहतर संबंध है।लेकिन यदि इन्हें हर हथकंडा अपना कर चमत्कार करने और सत्ता हथियाने में भाजपा का देश भर में बड़ा रिकार्ड है।सूत्रों की मानें तो भाजपा भी भिवंडी में अपना महापौर बिठाने के लिए अंदर ही अंदर जुगाड में जुटी है। इस बीच इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की भिवंडी का महापौर बनाने में बड़े पैमाने पर हॉर्स ट्रेडिंग हो सकती है। यह भी कड़वा सच है कि सपा से नाराज़ विधायक रईस शेख जिसे चाहेंगे उसे भिवंडी के महापौर की कुर्सी मिल जाएगी।
इतना ही 4 नगरसेवक वाली कोणार्क विकास आघाड़ी इससे पहले भी मात्र छह नगरसेवक लेकर महापौर बना चुकी है।पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास 47 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत होने के बावजूद कोणार्क विकास आघाड़ी ने कांग्रेस के 18 नगरसेवको ने पार्टी से बगावत कर कोणार्क को सपोर्ट कर महापौर बनाया था।उसी के तर्ज पर कोणार्क सपा के छह नगरसेवकों के साथ राकांपा व कांग्रेस को साथ लेकर अपना मेयर बना सकती है।अब देखना है कि राजनीतिक ऊंट किस करवट घूमता है और मनपा में किसका महापौर बनता है ?

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