भिवंडी में नन्हे हाफिज़ का अद्भुत कारनामा, महज 16 महीनों में कुरआन पाक हिफ़्ज़ पूरा

ठाणे भिवंडी

अब्दुल गनी खान भिवंडी :
शहर के प्राचीन और प्रतिष्ठित दीऩी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम अशरफ़िया रज़ाक़िया, ग़ौरी पाड़ा में हाल ही में सालाना जलसा-ए-दस्तारबंदी का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर उलेमा, हाफिज़, समाज के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी रिज़वान ख़ान साहब की सुमधुर आवाज़ में नात और मनक़बत से हुई। उन्होंने इमाम-ए-आज़म हज़रत नुमान बिन साबित अबू हनीफ़ा रहमतुल्लाह अलैह की ज़िंदगी और उनकी महान दीऩी ख़िदमात पर प्रकाश डाला। इसके बाद विशेष वक्ता हज़रत मौलाना मुफ़्ती ज़ुबैर अहमद मिस्बाही साहब ने प्रभावशाली संबोधन करते हुए कुरआन से जुड़ाव और इल्म-ए-दीन की अहमियत बयान की।

इस सालाना जलसे में कुल 6 छात्रों की हिफ़्ज़ की दस्तारबंदी की गई। इनमें सबसे खास चर्चा का विषय बने नन्हे छात्र मुहम्मद आदिल शफ़ीक़ मोमिन, निवासी मक़री शाह, भिवंडी। मुहम्मद आदिल ने पहले मदरसा अशरफ़िया, मेमन मस्जिद में नाज़िरा कुरआन की तालीम हासिल की और उसके बाद दारुल उलूम अशरफ़िया रज़ाक़िया, ग़ौरी पाड़ा में दाख़िला लिया। कड़ी मेहनत और असातिज़ा की रहनुमाई में उसने मात्र 16 महीनों की अल्प अवधि में पूरा कुरआन करीम हिफ़्ज़ कर लिया और हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बनने का गौरव प्राप्त किया।

इस अवसर पर मौजूद उलेमा और मेहमानों ने बच्चे की इस असाधारण सफलता को अल्लाह का विशेष करम बताते हुए उसे, उसके माता-पिता और शिक्षकों को मुबारकबाद दी। अंत में दुआ की गई कि अल्लाह तआला इस बच्चे के हिफ़्ज़ को हमेशा महफ़ूज़ रखे, उसे नेक और अमल करने वाला आलिम-ए-दीन और मुफ़्ती-ए-शरअ बनाए, ताकि वह शरीअत-ए-मुतह्हरा के अनुसार समाज की सही रहनुमाई कर सके।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *