भिवंडी में पत्थरों के खदानो में सुरक्षा की अनदेखी, ठेकेदारो पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन उदासीन

भिवंडी

खदानों में जमा पानी में डूबकर आए दिन जा रही लोगो की जाने,सुरक्षा की अनदेखी

पत्थर माफियाओं द्वारा किया जाता है रॉयल्टी की चोरी,उत्खनन विभाग की मिलीभगत

विशेष संवाददाता

भिवंडी शहर के लिए पत्थरों की खदान अभिशाप साबित हो रही है।पत्थर तोड़ने वाले ठेकेदार पत्थर तोड़कर बेचकर मालामाल हो रहे है और खदानो में बड़े बड़े खड्डे करके छोड़ देते है।जिसमे नहाने के दौरान बच्चे डूब जा रहे है।पिछले तीन माह में चार बच्चो को खदानों में जमा पानी में डूबने के कारण मौत हो चुकी है।जिसका मुख्य कारण खदानों में सुरक्षा का अभाव बताया जाता है।बावजूद प्रशासन इन खदान ठेकेदारों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।जिसे लेकर लोगों में आश्चर्य व्याप्त है।

भिवंडी शहर व तालुका क्षेत्र में कई दर्जन पत्थरों की खदाने है।जिसमे से शहर के अंदर की सभी खदाने पूरी तरह से बंद है।जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 20 पत्थर की खदानो का अस्तित्व में है।जिसे तोड़ने व पत्थरों को बेचने का ठेका ठाणे जिला अधिकारी द्वारा एक साल ,तीन साल व पांच सालो के लिए अलग अलग ठेकेदारों को विभाग द्वारा खनन का पट्टा निर्गत किया गया है।जो पहाड़ों को तोड़कर बेचते है तथा उसकी रॉयल्टी जिलाधिकारी कार्यालय में जमा करना रहता है।हालांकि बारिश के कारण ठाणे जिले में पूरी तरह से पत्थर खदानों से उत्खनन पर रोक लगी है।बावजूद पत्थर माफियाओं द्वारा उत्खनन का काम बदस्तूर जारी है।

      रॉयल्टी में किया जाता है झोल

सूत्र बताते है कि खदान ठेकेदार द्वारा सरकार की रॉयल्टी का बड़े पैमाने पर झोल किया जाता है।सरकार द्वारा एक गाड़ी पर 1200 रुपए की रॉयल्टी निर्धारित की गई है।लेकिन माफिया सौ गाड़ी पर मात्र पांच गाड़ी का टैक्स भरते है बाकी 95 गाड़ीयो का किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं भरा जाता जाती है।इतना ही नही बताते है कि जब तसिलदार द्वारा रॉयल्टी चोरी करते हुए गाड़ी पकड़ी जाती है तो ठेकेदार पर कार्रवाई के बजाय गाड़ी का बॉन्ड भरवाकर रॉयल्टी लेकर उसे छोड़ दिया जाया है।इस चोरी के कारोबार में खनन अधिकारी की भी मिलीभगत रहती है।जिससे चोरी की वारदात बढ़ रही है।

उत्खनन के दौरान सुरक्षा की कोई इंतजाम नहीं

समाजसेवक कपिल मिश्रा का कहना है कि  पत्थर खदानों के ठेकेदारो द्वारा खनन के दौरान सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया जाता है।ठेकेदार द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है।जिसके कारण पत्थर तोड़ने के दौरान दुर्घटना आम हो गई है।उनका कहना है कि ठेकेदार खदानों में खड्डा करने छोड़ देता है।लेकिन न तो उसे समतल किया जाता है और न ही वहा डेंजर जोन का कोई बोर्ड लगाया जाता है।जिसके कारण खदानों में बारिश के बाद इकट्ठा हुए पानी में डूबने की घटनाएं आए दिन घटती रहती है।इतना ही नही उन्होंने ठेकेदारों पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया है।उन्होंने बताया कि ठेकेदार जेलेटिक बम द्वारा पहले पत्थर तोड़ते है बाद में उसे मशीन द्वारा छोटा छोटा टुकड़ा कर भवन निर्माता व अन्य लोगो को बेचा जाता है।

खदानों में डूबने से मौत होने का सिलसिला जारी

भिवंडी शहर के भंडारी कंपाउंड इलाके के 72 गाले इलाके में स्थित पत्थर की खदान के तालाब में तीन दिन पहले लापता हुए रोशन पासवान (21)नामक युवक का शव रविवार सुबह बरामद हुआ है।जबकि आए दिन खदानों में जमा पानी में डूबकर मरने का सिलसिला जारी है।कुछ माह पहले अंजुरफाटा इलाके के न्यू ओसवाल पार्क के में रहने वाले दो चचेरे भाईयो की खदान की पानी में डूबने से दोनो की मौत हो गई थी।दोनों पानी में तैरने गए थे।इससे पहले तीन मार्च को कालवार गांव के पत्थर खदान में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।जो भंडारी कंपाउंड इलाके के रहने वाले थे और खेलने के बाद खदान में जमा पानी में नहाने के दौरान डूब गए थे।हैरत की बात यह है कि पुलिस एसे मामलो में आकस्मिक मौत का केस दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है।जबकि खदानों के ठेकेदारों पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है।

इधर तहसीलदार अभिजीत खोले का कहना है कि ठेका देने से लेकर रॉयल्टी वसूलने की सारी जिम्मेदारी जिला अधिकारी का होने की बात कह कर कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।जब उनसे पूछा गया की अभी तक एक वर्ष में कितने पत्थर माफियाओं पर तसिलदार कार्यालय द्वारा कार्रवाई की गई अथवा दंड वसूला गया तो उन्होंने कुछ बताते से इनकार करते हुए जिलाधिकारी से बात करने की बात कही।जबकि इस संदर्भ में जिलाधिकारी से कोई बात नही हो सका।

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