विशेष संवाददाता
भिवंडी मनपा की पहली विशेष महासभा में करोड़ों रुपये के आर्थिक खर्चों को मंजूरी देने के प्रस्ताव, प्रशासन द्वारा सदन के सामने औपचारिक रूप से रखे बिना ही चर्चा के बाद मंजूर कर लिए गए। इस कार्यप्रणाली पर कई सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताया है। महापौर नारायण चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में उपमहापौर तारिक मोमिन, आयुक्त अनमोल सागर, सभी अधिकारी और बड़ी संख्या में नगरसेवक उपस्थित थे।

इस विशेष महासभा में मुख्य रूप से दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मंजूरी दी गई।मानसून पूर्व शहर के छोटे-बड़े नालों और मुख्य सड़कों के किनारे की गटर सफाई के लिए 2,92,99,574 के खर्च को मंजूरी।
480 मीट्रिक टन प्रतिदिन कचरा संग्रहण क्षमता वाले ‘ट्रांसफर स्टेशन प्रोजेक्ट’ के निर्माण हेतु कुल 19,52,34,572 का प्रस्ताव था। इसमें से नगर पालिका के 30% हिस्से के रूप में 5,85,70,372 के खर्च को मंजूरी दी गई।नाला सफाई पर हुई चर्चा में मनोज काटेकर, कमलाकर पाटील, फराज बहुद्दीन, एड. वैभव भोईर, सुमित पाटील, नीलेश चौधरी, ऋषिका राका, रोमा आलशी और प्रशांत लाड ने हिस्सा लिया। फराज बहुद्दीन ने सवाल उठाया कि जब पांचों प्रभाग समितियों में गटर और नालों का माप अलग-अलग है, तो प्रस्तावित टेंडर की राशि एक समान कैसे हो सकती है? उन्होंने टूटे हुए चेंबरों की मरम्मत न होने की ओर भी ध्यान दिलाया।
मनोज काटेकर ने कहा कि सफाई केवल दिखावे के लिए नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शहर में कहीं भी जलभराव न हो। ऋषिका राका ने काम के ऑडिट और निगरानी की मांग की। आयुक्त अनमोल सागर ने आश्वासन दिया कि सफाई के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों को साथ लिया जाएगा और श्रमिकों की उपस्थिति के प्रमाणों की जांच की जाएगी। लापरवाही मिलने पर ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी। महापौर ने स्पष्ट किया कि देरी से बचने के लिए इस बार दो महीने पहले ही मंजूरी दी जा रही है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत ट्रांसफर स्टेशन प्रोजेक्ट पर चर्चा के दौरान सदन में हंगामा हुआ।
सदस्यों ने मांग की कि प्रशासन पहले यह बताए कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार से मिले करोड़ों रुपये कहां खर्च किए गए। प्रशांत लाड ने विरोध जताया कि बिना प्रस्तावना पढ़े चर्चा कैसे शुरू हुई, जिसके बाद उपायुक्त विक्रम दराडे ने प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने बताया कि ईदगाह (120 टन), म्हाडा कॉलोनी (160 टन) और फेणेपाडा (200 टन) में कचरा एकत्र कर कैप्सूल बनाए जाएंगे और डंपिंग ग्राउंड भेजे जाएंगे।
कमलाकर पाटील ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब डंपिंग ग्राउंड पर कचरा निस्तारण की प्रक्रिया 441 प्रति टन में हो रही है, तो ट्रांसफर स्टेशन पर मशीनरी और प्रोसेसिंग के लिए 670 प्रति टन का दर देना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकारी धन की सरासर बर्बादी है।

