प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल, गुटखा माफियाओं पर नरमी और छोटे दुकानदारों पर सख्ती से मचा हड़कंप

भिवंडी

अब्दुल गनी खान
भिवंडी। भिवंडी में अन्न एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर प्रतिबंधित गुटखा माफियाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे दुकानदारों पर छापेमारी कर कार्रवाई किए जाने से बाजार में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, अन्न एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 15 अप्रैल 2026 को वंजारपट्टी नाका क्षेत्र में शालू जनरल स्टोअर्स, अपनी पान शॉप और बारादरी पान शॉप पर छापेमारी की। इस दौरान दुकानों से प्रतिबंधित खाद्य सामग्री बरामद होने पर कुल 39,473 रुपये मूल्य का माल जब्त किया गया। साथ ही तीन दुकानदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पुलिस के अनुसार, जिन दुकानदारों पर कार्रवाई की गई है उनमें फैजल कुन्हाबदुल्ला, सोमनाथ शेट्टी और मोहम्मद तयब कैसर शामिल हैं। इन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 123, 223, 274 और 275 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक म्हस्के कर रहे हैं।

इसी बीच प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शहर में बड़े स्तर पर गुटखा माफिया सक्रिय हैं, जो दुकानदारों को प्रतिबंधित गुटखे की सप्लाई करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में क्राइम ब्रांच और एफडीए की संयुक्त कार्रवाई में सोनाले गांव से जब्त किए गए करीब 63 लाख रुपये के प्रतिबंधित गुटखे को कोर्ट के आदेश पर 10 अप्रैल को डंपिंग ग्राउंड में नष्ट करने के लिए दफनाया गया था। लेकिन उसी रात माफियाओं द्वारा उसे निकालने की कोशिश किए जाने की घटना सामने आई, जिससे इलाके में तनाव फैल गया था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, उस दौरान दो गुटों में मारपीट भी हुई थी। इसके बावजूद अब तक न तो गुटखा माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही एफआईआर दर्ज की गई है। इससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

वहीं, भिवंडी मनपा के उपायुक्त विक्रम दराडे ने बताया कि मामले में भिवंडी तालुका पुलिस को पत्र भेजा गया है और दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि प्रशासन गुटखा माफियाओं पर सख्ती दिखाए तो अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लग सकती है।

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