साइबर ठगी अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 11 आरोपी गिरफ्तार,5 लाख का माल जब्त

भिवंडी

अब्दुल गनी खान
भिवंडी बेरोजगारी व गरीब और अशिक्षित लोगों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश भिवंडी पुलिस ने किया है.शांतिनगर पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने गोवा के वास्को इलाके में छापा मारकर सात आरोपियों सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके कब्जे से दो लैपटॉप, 30 मोबाइल फोन, 11 बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिमकार्ड और अन्य सामग्री मिलाकर कुल 5.10 लाख रुपये का माल जब्त किया है।

डीसीपी शशिकांत बोराटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कुछ दिन पहले नौकरी का झांसा देकर भिवंडी स्थित महाराष्ट्र बैंक की शाखा में एक खाता खोला गया था। आरोपी ने पासबुक, एटीएम और सिमकार्ड अपने कब्जे में लेकर साइबर अपराधियों को सौंप दिए। जब खाते में संदिग्ध लेन-देन हुआ तो शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी बैंक और पुलिस को दी। इस मामले में भिवंडी निवासी राम गुप्ता, अली मोमिन और नावेद शेख पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।जांच में सामने आया कि आरोपियों ने भिवंडी के 70 से 80 गरीब लोगों से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें गोवा और मध्यप्रदेश भेजा था। इन खातों का उपयोग ऑनलाइन साइबर ठगी और गेमिंग मनी की हेराफेरी में किया जा रहा था।गहन छानबीन के बाद पुलिस टीम ने वास्को के सुप्रीम होटल में छापा मारकर सात आरोपियों को रंगे हाथ ऑनलाइन ठगी करते हुए पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों में आनंद आशोक मेघवानी (मध्यप्रदेश), भोला प्रदीप यादव (बिहार), लालचंद सुनील मुखिया (बिहार), गौरव भुवनेश्वर यादव (बिहार), रोहितकुमार प्रमोद यादव (बिहार), राजाकुमार चक्रधर यादव (बिहार) और सौरभ अशोक शर्मा (छत्तीसगढ़) शामिल हैं।पुलिस के मुताबिक आरोपी महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के गरीब व अशिक्षित लोगों से महज 5,000 रुपये में बैंक अकाउंट किट और मोबाइल सिमकार्ड खरीदते थे और फिर उनका उपयोग ठगी के लिए करते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए वे हर 15 दिन में ठिकाना बदलते रहते थे। आरोपियों को 18 अगस्त को गोवा से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 25 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। यह कार्रवाई डीसीपी (परिमंडल-2) भिवंडी शशिकांत बोराटे, एसीपी सचिन सांगले, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विनायक गायकवाड़ के मार्गदर्शन में पुलिस निरीक्षक विनोद पाटील, निरीक्षक अतुल अडुरकर और साइबर क्राइम टीम ने मिलकर अंजाम दी।

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