कल्याण रोड व्यापारी एवं रहिवासी संघर्ष समिति ने उठाए गंभीर सवाल
अब्दुल गनी खान
भिवंडी – भिवंडी-निज़ामपुर शहर महानगरपालिका द्वारा 12 अगस्त 2025 को जारी किए गए प्रारूप डेवलपमेंट प्लान पर शहर के नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं ने गंभीर आपत्ति जताई है। संघर्ष समिति का आरोप है कि यह प्लान वास्तव में भिवंडी शहर के विकास का नहीं, बल्कि बिल्डर्स लॉबी को लाभ पहुंचाने का प्लान है।

संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2021 में राजीव गांधी चौक से टेमघर तक मेट्रो-5 मार्ग को भूमिगत करने का निर्णय लिया था, ताकि कल्याण रोड पर स्थित हज़ारों दुकानें, मकान और धार्मिक स्थल सुरक्षित रह सकें। नागरिकों ने इस फैसले का स्वागत भी किया था। लेकिन अब महानगरपालिका के नए डेवलपमेंट प्लान में कल्याण रोड पर पुनः 20-20 फुट चौड़ीकरण का प्रस्ताव लाकर नागरिकों के साथ धोखा किया गया है।
समिति के पदाधिकारी सदाब उस्मानी का आरोप है कि कई आरक्षित भूखंडों से आरक्षण हटाकर उन्हें रेसिडेंशियल और कॉमर्शियल जोन में बदल दिया गया है, जिससे चुनिंदा बिल्डर्स को सीधा फायदा होगा।
ज़ीनत कंपाउंड, टेमघर, कनेरी, भादवड, शांतिनगर समेत कई क्षेत्रों में आरक्षण में फेरबदल कर प्रोजेक्ट्स को लाभ पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहाँ नागरिकों ने हज़ारों की संख्या में ऑब्जेक्शन दाखिल किए, उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, जबकि जिन आरक्षित संपत्तियों पर किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई, वहाँ बड़े बदलाव किए गए हैं।
संघर्ष समिति का कहना है कि राज्य सरकार ने कल्याण रोड को बचाने के लिए 1700 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो भूमिगत करने का निर्णय लिया, मगर उसी समय महानगरपालिका कल्याण रोड को तोड़ने की योजना बना रही है।
समिति ने उपमुख्यमंत्री एवं नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे से मांग की है कि इस प्रारूप डेवलपमेंट प्लान को रद्द किया जाए और हज़ारों दुकानों, मकानों व धार्मिक स्थलों को टूटने से बचाया जाए।

