अब्दुल गनी खान
भिवंडी:औकाफ़ (वक़्फ़ संपत्तियों) के संरक्षण और उनके डिजिटल पंजीकरण को लेकर भिवंडी में जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस क्रम में शुक्रवार रात 10 बजे सुन्नी जामा मस्जिद कोटरगेट के हॉल में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक की सरपरस्ती क़ाज़ी-ए-शहर भिवंडी, मुफ़्ती मुबश्शिर रज़ा अज़हर मिस्बाही साहब क़िबला ने फ़रमाई।
बैठक की शुरुआत में तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत भिवंडी के जनरल सेक्रेटरी मौलाना शमशाद नूरी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद मौलाना अली हुसैन हाशमी हुदवी ने वक़्फ़ बोर्ड के प्रतिनिधियों का परिचय उपस्थित लोगों से कराया।

वक़्फ़ बोर्ड के प्रतिनिधि मोहम्मद अशफ़ाक़ शेख और फ़ैज़ान मोमिन ने भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए “उम्मीद पोर्टल” के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल औकाफ़ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसके माध्यम से देशभर की मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और दरगाहों की वक़्फ़ संपत्तियों को ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है।
प्रतिनिधियों ने बताया कि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरी तरह निःशुल्क है और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी उनके कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।

कार्यक्रम के दौरान ट्रस्टियों और ज़िम्मेदारों की ओर से कई प्रश्न पूछे गए, जिनके संतोषजनक उत्तर प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए। एडवोकेट सरफ़राज़ अंसारी ने भी उम्मीद पोर्टल से संबंधित कुछ कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला।
अंत में सुन्नी जामा मस्जिद कोटरगेट के ट्रस्टी नसीम रज़ा, हाजी शकील, तथा तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत के प्रतिनिधि इजाज़ शेख और हाजी मज़म्मिल शेख ने वक़्फ़ बोर्ड के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और सभी उपस्थित ट्रस्टियों व ज़िम्मेदारों का आभार व्यक्त किया।
यह बैठक औकाफ़ संपत्तियों की सुरक्षा और उनके डिजिटल संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।

