विशेष संवाददाता नई दिल्ली।
पिछले पांच वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में भारतीयों द्वारा नागरिकता छोड़े जाने का मामला सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच कुल 8,96,843 लोगों ने भारतीय नागरिकता का त्याग किया है, जो लगभग 9 लाख के आंकड़े के करीब है।
यह जानकारी केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2022 के बाद भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हर वर्ष हजारों लोग बेहतर शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और जीवन स्तर की संभावनाओं के चलते अन्य देशों की नागरिकता अपना रहे हैं। इनमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों को प्राथमिक गंतव्य के रूप में चुना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अवसरों की बढ़ती उपलब्धता, दोहरी नागरिकता की सुविधा (जो भारत में मान्य नहीं है) और प्रवासी भारतीयों के लिए विदेशों में अनुकूल नीतियां इस प्रवृत्ति के प्रमुख कारण हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि नागरिकता छोड़ना एक व्यक्तिगत निर्णय है और इसे देश की आर्थिक या सामाजिक स्थिति से सीधे तौर पर जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी, आंकड़ों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है और सरकार से इस विषय पर विस्तृत अध्ययन की मांग की है।

