सपा विधायक रईस कासम शेख की बगावत से बदला सियासी गणित..

भिवंडी

कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) से 36 समर्थक विजयी, सपा का भिवंडी पूर्व में खाता भी नहीं खुला..

विशेष संवाददाता
भिवंडी मनपा चुनाव में सपा विधायक रईस कासम शेख की बगावत ने भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र का सियासी गणित पूरी तरह बदल दिया। कभी समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले भिवंडी पूर्व में इस बार सपा का खाता तक नहीं खुल सका। वहीं विधायक रईस शेख के समर्थकों ने कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए कुल 36 सीटों पर जीत दर्ज की है।
बताया जाता है कि भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से सपा का प्रतिनिधित्व रहा है और पार्टी का मजबूत आधार माना जाता था। मनपा चुनाव को लेकर सपा से टिकट पाने वालों की लंबी कतार थी, लेकिन विधायक रईस शेख की पार्टी से बगावत के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। सपा ने पूरे शहर में 54 उम्मीदवार उतारे, लेकिन पूर्व विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल सकी।

हालांकि भिवंडी पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सपा को सीमित सफलता मिली। प्रभाग 8 से पूरे पैनल में क्रमशः (अ) मोहम्मद आजीब जमाल अहमद मोमिन, (ब) क. शाफ मोमिन, (क) अंसारी शबाना शमीम और (ड) शेख अरीब मोहम्मद याकूब विजयी हुए। इसके अलावा प्रभाग 19 (ब) से शेख सलमाबानों मो. अकरम और प्रभाग 19 (ड) से खान अमल ओबैद ने कुल 6 सीट पर जीत दर्ज की।
दूसरी ओर, विधायक रईस शेख के समर्थकों ने कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) के माध्यम से बड़ी सफलता हासिल की। राकांपा (शरद पवार गुट) से प्रभाग 2, 4 और 5 सहित कुल 12 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस पार्टी से विधायक रईस शेख के समर्थक 24 उम्मीदवार विजयी रहे। इस तरह कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) से कुल 36 समर्थकों की जीत दर्ज हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने यह साफ कर दिया है कि भिवंडी पूर्व में सपा की पारंपरिक पकड़ कमजोर हुई है और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व तथा गुटबाजी का असर सीधे नतीजों में दिखाई दिया है। अब इन नतीजों के बाद भिवंडी की नगर राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

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