259 एकड़ जमीन को विकसित करने का हुआ सौदा,दिया गया सिर्फ 24 एकड़ ही जमीन
विशेष संवाददाता
भिवंडी के नारपोली पुलिस स्टेशन में जमीन विकास और बिक्री के नाम पर कथित रूप से 8 करोड़ 10 लाख रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने अलग-अलग धाराओं के तहत दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन विकास के लिए करार करने के बावजूद आरोपियों ने उन्हें जमीन का कब्जा नहीं दिया, बल्कि उसका एक हिस्सा अन्य लोगों को बेचकर करोड़ों रुपये की ठगी की।
नारपोली पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत में मुंबई के भायखला निवासी दिलीपकुमार फुलचंद जैन (58) ने बताया कि वर्ष 2006 से 2023 के बीच भिवंडी स्थित उनके कार्यालय में आश्रा रियल्टी के साझेदारों ने रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका स्थित मौजे शिरढोण की 259 एकड़ जमीन को विकसित करने के लिए उनकी कंपनी प्रगति कॉर्पोरेशन के साथ करार किया था। आरोपियों ने शेतकरी किसानों से जमीन खरीदकर उसे विकास के लिए सौंपने का आश्वासन दिया था। हालांकि, करार और पूरक करारनामे के बावजूद उन्हें केवल 24 एकड़ जमीन का वास्तविक कब्जा दिया गया। इसके बाद शेष 26 एकड़ और अन्य 209 एकड़ जमीन उन्हें विकास के लिए नहीं दी गई।उनका आरोप है कि आश्रा रियल्टी के साझेदार आशीष चंद्रकांत शाह, अपर्णा आशीष शाह तथा अन्य लोगों ने आपसी साठगांठ कर जमीन के हिस्सों को अन्य व्यक्तियों को बेच दिया। इतना ही नहीं, निर्माण के लिए दी गई 26 एकड़ जमीन में से भी लगभग 4.8 एकड़ जमीन शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना बेच दी गई।जैन का आरोप है कि बाकी जमीन भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराने का भरोसा देकर उनसे 8.10 करोड़ रुपये ले लिए गए और बाद में आर्थिक धोखाधड़ी की गई।इस मामले में नारपोली पुलिस ने दिलीप जैन की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 34 व 409 के तहत दो एफआईआर दर्ज किया है।पुलिस ने बताया कि फिलहाल इस मामले में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक वसंत पाटील कर रहे हैं।इस बहुचर्चित जमीन घोटाले के सामने आने के बाद भिवंडी और आसपास के रियल एस्टेट क्षेत्र में हलचल मच गई है। पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों, करारनामों और जमीन की बिक्री से संबंधित लेनदेन की गहन जांच कर रही है।

