अब्दुल गनी खान
नासिक, प्रतिनिधि। नासिक में TCS से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले ने अब हाई-प्रोफाइल रूप ले लिया है। जांच में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, पैसों के लेन-देन और एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिलने से मामला और गंभीर हो गया है।
नासिक रोड कोर्ट में मुख्य आरोपी निदा खान की अंतरिम अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बीच, पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं, जिनसे कथित तौर पर पीड़ितों को बहला-फुसलाकर जाल में फंसाने की बात सामने आई है।

कोर्ट में तीखी बहस, गिरफ्तारी का खतरा बरकरार
मामले की सुनवाई जज के.जी. जोशी की अदालत में हुई, जहां बचाव पक्ष और अभियोजन के बीच जोरदार बहस हुई। बचाव पक्ष के वकील राहुल कसलीवाल ने दलील दी कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कोई विशेष कानून नहीं है, इसलिए आरोपों की वैधता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामला 2022-23 की घटनाओं से जुड़ा है और संबंधित तथ्यों की जांच पहले से जारी है।
वहीं, विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने, SIT प्रमुख संदीप मितके के समर्थन से, जमानत का कड़ा विरोध किया। अदालत ने अगली सुनवाई (2 मई) तक आरोपी को गिरफ्तारी से कोई राहत नहीं दी है, जिससे उसकी गिरफ्तारी का खतरा बना हुआ है।
जांच में सामने आई ‘साजिश’ की परतें
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में पीड़ित की पहचान बदलने और उसे कथित रूप से जबरन धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने के लिए मजबूर करने के सबूत मिले हैं। आरोप है कि पीड़ित का नाम बदलकर “हानिया” रखा गया।
जांच में मोबाइल रील्स और धार्मिक सामग्री से जुड़े लिंक भी सामने आए हैं, जिनके जरिए कथित रूप से मानसिक दबाव बनाया गया। आरोप यह भी है कि पीड़ित को हिजाब पहनने, रोजा रखने और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।
मलेशिया और मालेगांव कनेक्शन
जांच एजेंसियों ने मामले में एक संभावित अंतर्राष्ट्रीय कड़ी का भी खुलासा किया है। जानकारी के मुताबिक, पीड़ित को मलेशिया भेजने की योजना पर काम किया जा रहा था।
साथ ही, पैसों के लेन-देन का एक ‘मनी ट्रेल’ मालेगांव से जुड़ता हुआ पाया गया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि बातचीत में बार-बार इस्तेमाल होने वाला “पार्टी” शब्द संभवतः मालेगांव स्थित कुछ संस्थाओं के लिए सांकेतिक रूप से प्रयोग किया जा रहा था।
मामला और उलझा, जांच जारी
इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। पुलिस और SIT अब अंतर्राष्ट्रीय लिंक, फंडिंग और नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी है। आने वाले दिनों में कोर्ट के फैसले और जांच के निष्कर्ष इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेंगे।

