भिवंडी मनपा के कोनवाडा स्थित गोदाम में लगी भीषण आग ने अब तूल पकड़ लिया है। शुरुआती तौर पर सामान्य आगजनी मानी जा रही यह घटना अब करोड़ों रुपये के कथित घोटाले और सबूत मिटाने की साजिश के शक में घिर गई है।

कोबड़पाड़ा इलाके में स्थित इस गोदाम में वर्षों से खराब वाहन, मशीनरी और अन्य कबाड़ सामग्री जमा थी, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। भिवंडी निजामपुर महानगरपालिका ने इस स्क्रैप की नीलामी के लिए टेंडर भी जारी किया था, लेकिन बाद में तकनीकी कारणों का हवाला देकर इसे अचानक रद्द कर दिया गया।
टेंडर रद्द, फिर आग—उठे सवाल
टेंडर रद्द होने के बाद इस कबाड़ पर कथित कबाड़ माफिया की नजरें होने की चर्चा थी। इसी बीच गोदाम की जमीन पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना सामने आई। नियमों के मुताबिक, वहां मौजूद स्क्रैप को पहले सुरक्षित स्थान पर हटाया जाना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जेसीबी मशीनों की मदद से कबाड़ को एक जगह इकट्ठा कर उसमें आग लगा दी गई। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह महज लापरवाही थी या फिर सुनियोजित तरीके से सबूत मिटाने की कोशिश?
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
मामले में कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। आरोप है कि ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। वहीं अग्निशमन विभाग और गोदाम से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि उद्यान विभाग के निर्देश पर वाहनों को जलाया गया।
जांच की मांग तेज
समाजसेवक गनी खान ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे साधारण आग नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार करार दिया है। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। हालांकि, मनपा के संबंधित अधिकारी इस मामले में जानकारी से इनकार कर रहे हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

