जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्र नियमों पर बवाल, प्रवासी मजदूरों को राहत देने की मांग तेज

भिवंडी

अब्दुल गनी खान

भिवंडी:महाराष्ट्र में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों को लेकर गरीब और प्रवासी श्रमिकों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी मुद्दे पर अब भिवंडी की श्रमजीवी सहयोग संस्था ने राज्य सरकार से नियमों में तत्काल संशोधन की मांग की है।

संस्था के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अय्यूब ऐनुल्ला शाह ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के मौजूदा दिशा-निर्देशों के कारण बड़ी संख्या में लोग जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में असमर्थ हो रहे हैं। विशेष रूप से दूसरे राज्यों से आकर महाराष्ट्र में काम करने वाले मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हैं।

पत्र में बताया गया है कि करीब 80 प्रतिशत गरीब मजदूर झोपड़पट्टियों या किराए के अस्थायी घरों में रहते हैं। लगातार स्थान बदलने की वजह से उनके पास स्थायी निवास का ठोस प्रमाण नहीं होता, जिसके कारण वे प्रशासन द्वारा मांगे जा रहे दस्तावेज पूरे नहीं कर पाते और प्रमाणपत्र प्रक्रिया में अटक जाते हैं।

संस्था ने यह भी गंभीर मुद्दा उठाया है कि इन श्रमिकों के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। उनके बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं और वे स्थानीय चुनावों में मतदान भी करते हैं, इसके बावजूद केवल पते के कड़े प्रमाण की शर्त के चलते उन्हें जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।

मोहम्मद अय्यूब शाह ने मुख्यमंत्री से इस आदेश पर पुनर्विचार कर गरीब और प्रवासी नागरिकों के हित में नए, व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है, ताकि प्रमाणपत्र प्रक्रिया सरल और सुलभ हो सके।

संस्था ने प्रशासन से इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर स्पष्ट और लिखित जवाब देने की भी मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार इस संवेदनशील और जमीनी मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

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